अंतरराष्ट्रीयचर्चा में

संयुक्त राष्ट्र महासंघ मे मोदी का विश्व-मिथक संबोधन

 

  • रंगनाथ द्विवेदी 

 

संयुक्त राष्ट्र महासंघ के 74 वे सत्र संबोधन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा बोला गया ” उनका एक-एक वाक्य पूरे विश्व-मिथक की तरह था”.सच तो ये है कि वे बोल नही रहे थे अपितू एक विश्व-आयाम स्थापित कर रहे थे.अगर हम स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी को संबोधन व बेहतरीन वक्तव्य का अमृत कलश कहते है तो ये निश्चित जानिये की हम वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके संयुक्त राष्ट्र महासंघ में दिये बेहतरीन वक्तव्य के लिये उन्हें–“अपने भारत का मयूर सिंहासन कह सकते है”.

बेशक संयुक्त राष्ट्र महासंघ को पाँच प्रमुख देशो की बपौती व दब-दबे का संघ कहा जाता है वे पाँच देश–चीन,फ्रांस, रुस,इग्लैंड व अमेरिका है.ऐसी परिस्थिति और परिवेश में–“नरेन्द्र मोदी
का एक विश्व-नेता की तरह दिया गया संबोधन संयुक्त राष्ट्र महासंघ अपने स्मृतियो में हमेशा के लिये सहेजेगा”.

नरेन्द्र मोदी ने इसके साथ ही महात्मा गाँधी की 150 वी जयंती का जीक्र कर सत्य और अहिंसा की प्रासंगिकता को भी बड़ी व्यापकता के साथ प्रस्तुत किया.ये सच भी है कि–“विश्व-बारुद के धुएं में पुरी दुनिया को जिसकी महती आवश्यकता पड़ेगी वे महात्मा गाँधी की सत्य-अहिंसा व उनके विश्व-प्रेम व विश्व-उत्थान का चिंतन ही होगा”.महात्मा गाँधी का जन्म भारत में हुआ लेकिन उन्होंने जो भी सत्य व अहिंसा पे कार्य किये वे पूरे विश्व-गाँव के लिये था.प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वस्छ भारत मिशन गाँधी से पूर्णतः प्रेरित है.

मोदी ने संबोधन मे कहा कि–“हमारी संस्कृति और सभ्यता तीन हजार वर्ष पुरानी है,उसकी जड़े मजबूत है,हम जीव मे भी शिव की परिकल्पना करते है”.125 वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद का अमेरिका के शिकागो मे धर्म संसद मे उनके दिये वक्तव्य का भी जीक्र मोदी ने किया,जिसे आज भी वर्तमान दुनिया सहेजे और संभाले हुये है.

नरेन्द्र मोदी ने संक्षेप में ही भारतीय चिंतन का पूरा सार प्रस्तुत किया.जब उन्होने अपने संबोधन के दौरान इंगित किया कि-हमने और हमारे देश ने कभी भी किसी देश को युद्ध की भयावह विभीषिका नही दी,हमने हमेशा विश्व-बंधुत्व व भाईचारे का संदेश दिया.हमारे देश ने महात्मा बुद्ध का चिंतन दिया जिनका मूल ही “अहिंसा परमो धर्मः था”.

जैसा की सभी भारतीयों व विश्व को उम्मीद थी कि नरेन्द्र मोदी आतंकवाद पे भी कुछ बोलेगे,वे बोले भी,हाँ इस बोलने मे इतना अवश्य था कि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नही लिया,ये निर्णय मोदी का एक मास्टर स्ट्रोक था–अगर वे इस संबोधन मे पाकिस्तान का नाम लेते तो ये विश्व-मंच बहुत छोटा हो जाता,और पाकिस्तान को थोड़ी खुशी मिल जाती लेकिन नही आतंक को मोदी ने विश्व-समस्या से जोड़ पाकिस्तान के मंसूबे को ध्वस्त कर दिया.

उन्होनें कहा कि–“हमारी आवाज़ मे आतंक के खिलाफ दुनिया को सतर्क व सावधान करने की गंभीरता भी है और आक्रोश भी”. आतंक के नाम पे विश्व-समुदाय की चुप्पी या खामोशी–“विश्व-प्रेम के चिंतन को ठेस पहुँचाती है,आहत करती है”.जबकि विश्व-शांति व कल्याण के लिये ही इस “संयुक्त राष्ट्र महासंघ” का जन्म हुआ.ये आतंकवाद पुरी दुनिया के लिये,मानवता के लिये आज एक प्रमुख विश्व-चुनौती है,जिसके लिये पुरी दुनिया को एक होना ही होगा.

साथ ही संबोधन करते हुये उन्होंने कहा कि हम विकासशील देश है,हमारे देश की आबादी एक अरब से भी ज्यादा है,जहाँ की जनता ने मुझे दोबारा, पहले से कही ज्यादा भरोसा कर जिताया है मै उनकी उम्मीदों पे खरा उतरने की पूरी निष्ठा व लगन से कोशिश कर रहा हूं. मै नित नये अमूलचूल आवश्यक बदलाव कर रहा,कड़े कदम उठा रहा,भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को अब रातों को नींद नही आती.मै सड़क,आवास,बिजली,शिक्षा,स्वास्थ्य, सुरक्षा,रोजगार के तमाम कार्यपूर्ण करने को दृढ़-संकल्पित हूँँ,मैंसारे विश्व-लक्ष्य, जनसहयोग से बहुत जल्द प्राप्त कर लुुँगा ऐसा मेरा विश्वास है.

अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र महासंघ के अध्यक्ष को इंगित करते हुये मोदी ने कहा कि-“ग्लोबल वार्मिंग में हमारा योगदान बेहद मामुली है,लेकिन इससे निबटने में हम अग्रणी रहे”.हम अपने भारत में सबके सर छत व घर का सपना साकार कर रहे,हमें उम्मीद है कि हम अपने देश के गरीबो को 2022 तक 2 करोड़ घर बनाकर दे देंगें. पूरी विश्व-दुनिया ने वर्ष 2030 तक दुनिया को टीबी जैसी बीमारी से मुक्त करने का लक्ष्य रंखा है,उसे हम इस लक्ष्य के पाँच वर्ष पहले ही पूरा कर लेंगे.

नरेन्द्र मोदी का संयुक्त राष्ट्र महासंघ मे दिया गया. ये संबोधन महज एक संबोधन नही अपितू ये हर भारतीय लोगो का आत्मसंम्मान भी था. जो उनकी वाणी और दमकते हुये उनके ललाट से हो रहा था.भारत की जीवित संस्कृतियों व सभ्यताओ के मूल्यों का आधुनिक भारत और विश्व के साथ समावेशित करना उनके जादूई अभिव्यक्ति की बड़ी उपलब्धि रही.सच तो ये है कि–“कल पूरा विश्व इसी गुलदस्ते को अपने हाथो मे पकड़ने या थामने को बाध्य हो जायेगी, तब शायद वे पल ,वे लम्हें और मोदी का ये कथन ही समस्त विश्व-दुनिया का मार्गदर्शन करेगी”.संयुक्त राष्ट्र महासंघ के इस 74 वे सत्र का महानायक हमारे देश के उत्कृष्ट प्रधानमंत्री मोदी है,इसका हमें गर्व है.

भारत माता की जय,वंदेमातरम

लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं|

सम्पर्क- +917800824758, rangnathdubey90@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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