मैं कहता आँखन देखी

कमलेश तिवारी का पहले गला रेता गया या फिर गोली मारी गयी?

 

  • नवल किशोर कुमार

 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कमलेश तिवारी नामक एक शख्स की हत्या को लेकर एक के बाद एक कई खबरें आ रही हैं। मुंबई में शिवसेना के एक नेता ने कमलेश तिवारी के हत्यारों का सिर कलम करने वाले को एक करोड़ रुपए का इनाम देने की घोषणा की है। साथ ही यह भी कहा है कि इसके लिए कोई कानूनी प्रक्रिया की जरूरत नहीं है। एक वीडियो संदेश जारी करने  वाले शिवसेना के नेता ने अपना नाम अरूण पाठक बताया है।

कमलेश तिवारी की हत्या बीते शुक्रवार को लखनऊ स्थित हिंदू समाज पार्टी के दफ्तर में कर दी गयी। तिवारी इसका अध्यक्ष था। इसके पहले वह हिंदू महासभा का अध्यक्ष भी था। साथ ही बाबरी मस्जिद जमीन विवाद में वह सुप्रीम कोर्ट में एक अपील कर्ता भी था। वह इस्लाम धर्म के प्रवर्तक के खिलाफ विवादित बयान देने के बाद सुर्खियों में आया था। एक इस्लामी कट्टरपंथी ने उसका सिर कलम करने वालों को इनाम देने की घोषणा की थी।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने कमलेश तिवारी हत्या मामले में गुजरात के सूरत में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और दावा किया है कि उसकी हत्या की साजिश गुजरात में खास धर्म के लोगों द्वारा रची गयी। पुलिस का दावा यह भी है कि उसकी हत्या इस्लाम धर्म के प्रवर्तक के खिलाफ दिये गये बयान के कारण ही की गयी। इसे साबित करने के लिए कई तरह और बातें कही गयी हैं।

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लेकिन, अभी यह मामला बंद नहीं हुआ है। एक वीडियो जारी हुआ है जिसमें कमलेश तिवारी कह रहा है कि योगी सरकार के आते ही उसकी सुरक्षा हटा ली गयी। मेरी हत्या की साजिश रची जा रही है। एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें उसकी रोती-कलपती उसकी मां कुछ और बातें कह रही हैं। उनका कहना है कि कमलेश तिवारी की हत्या भाजपा वालों ने करवायी है। वह वीडियो में कोई श्रीप्रकाश गुप्ता का नाम ले रही हैं और उनके मुताबिक मंदिर पर कब्जे को लेकर कोई विवाद था। इस कारण कमलेश तिवारी की हत्या करायी गयी।

बताते चलें कि हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की शुक्रवार को उनकी पार्टी के कार्यालय में ही बदमाशों ने गला रेत कर हत्या कर दी थी। कुछ अखबारों ने लिखा है कि पहले उसे गोली मारी गयी और फिर उसका गला रेता गया। पुलिस ने इस मामले में अभी तक इसका खुलासा नहीं किया है कि पहले गला रेता गया या फिर पहले गोली मारी गयी? सवाल यह भी उठता है कि यदि पहले गोली मार दी गयी तब उसका गला क्यों रेता गया? या  फिर जब गला रेत दिया गया तब गोली क्यों मारी गयी?

कई समाचार पत्रों में खबर छपी है कि हत्या से पहले अपराधियों ने कमलेश तिवारी के साथ आधे घंटे तक बातचीत की। उसके साथ दही-बड़ा खाया और चाय भी पी। इसका मतलब यह तो साफ है कि हत्यारों को कमलेश तिवारी जानता था। यदि वे वही हैं जिन्हें उत्तर प्रदेश की पुलिस अपराधी कह रही है तो वे कौन थे जो कमलेश तिवारी के साथ मिठाइयां खा रहे थे। आज तक द्वारा जारी एक रिपोर्ट के हिसाब मिठाई के डिब्बे सूरत के थे।  इसलिए पुलिस ने सूरत में जाकर छापा मारा और अपराधियों को गिरफ्तार किया।

कमलेश तिवारी के साथ उसके चार सुरक्षा प्रहरी थे। हालांकि जब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी तब तिवारी को सात जवानों की सुरक्षा मिली हुई थी। योगी सरकार ने आते ही उसकी सुरक्षा घटाकर चार कर दी थी। सवाल यह कि जब हत्यारे कमलेश तिवारी के साथ बैठक चाय पी और मिठाई खा रहे थे तब वे कहां थे? सवाल यह भी कि क्या उस समय कमलेश तिवारी अपने दफ्तर में अकेले थे?

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कुछ अखबारों ने लिखा है कि कमलेश तिवारी ने ही अपने सुरक्षा प्रहरियों को बाहर भेजा। आजतक ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि हत्यारों ने नौकर को गोल्ड फ्लेक लेने भेजने के बाद वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस की ओर से अभी तक इस मामले में स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि जब हत्यारे तिवारी को गोली मारने के बाद इत्मीनान से गला रेत रहे थे (या फिर गोली मारने के पहले) तब सुरक्षा प्रहरी कहां थे?

इन सवालों के अलावा कई सवाल और भी हैं। कई सवाल और भी उभरेंगे। मसलन यह कि तिवारी को कितनी गोलियां मारी गयीं? गोलियां मारी गयीं तब आवाज तो हुई होगी? चूंकि उसका कार्यालय लखनऊ के भीड़भाड़ वाले इलाके में है तो फिर किसी ने गोलियां चलने की आवाज क्यों नहीं सुनी? सवाल यह भी कि जब गला रेता जा रहा था तब क्या तिवारी ने विरोध नहीं किया होगा? क्या वह चिल्लाया नहीं होगा? थोड़ी देर के लिए यह माना जा सकता है कि उसके सुरक्षा प्रहरी उसके दफ्तर के बाहर रहे होंगे, नौकर सिगरेट लाने बाहर गया होगा। लेकिन वे तिवारी की चीख तो सुन ही सकते थे।

बहरहाल, कमलेश तिवारी की हत्या में बड़े पेंच हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की कार्यशैली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। फिलहाल तो उसने तीन लोगों हिरासत में लेकर इस हत्याकांड को मजहबी जामा पहना दिया है। लेकिन जो सवाल कमलेश तिवारी की मां ने उठाया है और जो सवाल वारदात को लेकर उठ रहे हैं, वे वाकई गंभीर हैं। कमलेश तिवारी का सत्यम पहले ही योगी सरकार पर अविश्वास जता चुका है।

लेखक फॉरवर्ड प्रेस, दिल्ली के सम्पादक (हिन्दी) हैं|

सम्पर्क-  nawal4socialjustice@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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