मिजोरम

मिज़ोरम में ब्रू शरणार्थियों के मुद्दे

 

  • सुवालाल जांगु
राज्य के 6 बड़े नागरिक समाज और छात्र संगठनों की समन्वय समिति ने 04 अप्रैल को राज्य सरकार के साथ बातचीत में ब्रू-शरणार्थियों के मुद्दे पर सहमति बनने के बाद 11 अप्रैल को होने वाले लोकसभा मतदान का बहिष्कार और 8 अप्रैल से अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी बंद की घोषणा को वापिस ले लिया हैं | इससे पहले 1 अप्रैल को जन संगठनों की समन्वय समिति ने 11 अप्रैल को होने वाले एकमात्र लोक सभा सीट के लिए मतदान का बहिष्कार करने और 8 अप्रैल से राज्यव्यापी अनिश्चित बंद करने की घोषणा की थी | एनजीओ समन्वय समिति ने 04 अप्रैल को मीडिया को जारी किये गये एक बयान में अपने इस निर्णय की सूचना दी है | वैसे 02 अप्रैल से ही एनजीओ समन्वय समिति (एनजीओसीसी) और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर बातचीत शुरू हो गयी थी लेकिन 04 अप्रैल को दोपहर में राज्य सरकार और एनजीओसीसी के प्रतिनिधियों के बीच हुई अंतिम दौर की बातचीत में मतदान बहिष्कार और राज्यव्यापी बंद को वापिस लेने पर सहमति बनी |
एनजीओसीसी प्रमुख वनललरुआता ने बातचीत के बाद मीडिया को संबोधित करते हुये कहा, “हमने अपने निर्णय को, सरकार से हमारी मांग पर पुख्ता आश्वासन मिलने के बाद, बदला हैं |” एनजीओ समन्वय समिति के सचिव ललमाछूआना ने कहा, “हम नही चाहते कि राज्य में आम लोगों को कोई असुविधा हो इसीलिए हमने 01 अप्रैल के निर्णय को बदला हैं |” राज्य सरकार की तरफ से इस बातचीत का प्रतिनिधित्व  राज्य के मुख्य सचिव ललननमोइआ छुऔंगो कर रहे थे | मुख्य सचिव ने मीडिया को बताया कि एनजीओ समन्वय समिति के प्रतिनिधियों ने सरकार के आश्वासन पर अपने 01 अप्रैल के मतदान बहिष्कार करने के निर्णय को वापस लेने पर सहमति जताई है | सरकार ने कहा कि ब्रू-शरणार्थियों की मिज़ोरम में वापसी की  प्रक्रिया इस साल में पूरी कर ली जाएगी | इस साल के बाद उनकी वापसी के प्रयास बंद कर दिये जायेंगे | हालांकि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आशीष कुन्द्रा ने एनजीओ समन्वय समिति के 01 अप्रैल को लिये गये निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था | कुन्द्रा ने एनजीओ समन्वय समिति के लोकसभा मतदान का बहिष्कार करने के निर्णय की आलोचना करते हुये कहा था कि चुनाव को ब्रू-शरणार्थियों के पूर्णस्थापन का मंच बनाना असंगत और अव्यवहारिक होगा | इस मुद्दे को चुनाव बाद भी उठाया जा सकता हैं |
राज्य में अल्पसंख्यक ब्रू समुदाय के प्रभाव वाले क्षेत्रों में वन सम्पदा को कब्ज़ा करने की  बहुसंख्यक मिज़ो समुदाय की  राजनीति ने राज्य में ब्रू और मिज़ो समुदायों के बीच जनजातीय हिंसा का रूप ले लिया था | ब्रू लोग मिज़ोरम में रेआंग के नाम से जाने जाते हैं जो धार्मिक रूप से न तो ईसाई है और न ही हिन्दू हैं | 1997 में ब्रू और मिज़ो समुदायों के बीच जातीय हिंसा के चलते हजारों ब्रू लोग पड़ौसी राज्य त्रिपुरा में चले गये थे, जो पिछले 22 वर्षों से कंचनपुर और पानीसागर उपखंडों के 6 राहत शिविरों में रह रहे हैं | जिनमें लगभग 35 हज़ार ब्रू शरणार्थी लोग रहते हैं | इनमें लगभग 12 हज़ार पंजीकृत मतदाता हैं | अगस्त 2018 में ब्रू-शरणार्थियों, मिज़ोरम सरकार, त्रिपुरा सरकार और केंद्र सरकार के बीच ब्रू-शरणार्थियों के पूर्णस्थापन को लेकर एक बहुपक्षीय समझोता हुआ था | इसके अंतर्गत यह तय था कि ब्रू-शरणार्थियों को 31 दिसम्बर 2018 तक वापिस मिज़ोरम में चले जाना होगा और 01 अक्टूबर 2018 से राहत शिविरों में केन्द्रीय गृहमंत्रालय से की जा रही राहत सामग्री की आपूर्ति को बंद कर दिया जायेगा | लेकिन राज्य में नवम्बर 2018 में विधानसभा चुनाव और अब लोकसभा चुनावों को देखते हुये इस आपूर्ति को तीन बार बढ़ा दिया गया | अब इसे आखरी बार के लिए 01 नवम्बर 2019 तक बढ़ा दिया गया है |
एनजीओ समन्वय समिति ने पिछले 27 मार्च को ही चुनाव आयोग की ओर से मिज़ोरम-त्रिपुरा सीमा के पास कनमुन में विशेष मतदान केंद्र स्थापित किये जाने के खिलाफ लोकसभा चुनावों का बहिष्कार करने की धमकी दी थी | इसी सिलसिले में 1 अप्रैल को एनजीओ समन्वय समिति की बैठक में निर्णय लिया गया था कि अगर चुनाव आयोग हमारी मांग नहीं मानता है तो राज्य में 11 अप्रैल को लोकसभा मतदान का बहिष्कार और 8 अप्रैल से अनिश्चकालीन राज्यव्यापी बंद किया जायेगा | मिज़ोरम में नागरिक समाज संगठन जैसे यंग मिज़ो असोशिएशन (वाईएमए) और मिज़ो जिरलाई पो (मिज़ो छात्र संघ) 11 अप्रैल को लोकसभा मतदान के लिए राज्य में कनमुन में ब्रू-शरणार्थी मतदाताओं के लिए विशेष मतदान केंद्र बनाने का विरोध कर रहे हैं | मिज़ो संगठनों के नेताओं का कहना है कि ब्रू-शरणार्थी राज्य में वापिस नहीं आना चाहते है तो ऐसे में उनका नाम राज्य की मतदाता सूची में से हटा दिया जाना चाहिए | मिज़ो एनजीओ समन्वय समिति के प्रमुख वनललरुआता ने कहा, “हम चाहते है कि चुनाव आयोग ब्रू-शरणार्थी मतदाताओं के लिए राज्य में उनके मूल निवास स्थानों पर मतदान केन्द्रों की व्यवस्था करे |”
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आशीष कुंद्रा का कहना है कि कनमुन में विशेष मतदान केन्द्रों की स्थापना का आदेश चुनाव आयोग ने एक महीना पहले ही दे दिया था और  इसके लिए तैयारियां भी की जा रही हैं | दरअसल चुनाव आयोग त्रिपुरा में हजारों ब्रू-शरणार्थी मतदाताओं के लिए मिज़ोरम में त्रिपुरा सीमा के पास कनमुन गाँव में 15 विशेष मतदान केंद्र स्थापित करने की तैयारिया पहले से ही कर रहा है| नवंबर 2018 के मिज़ोरम विधानसभा चुनाव में पहली बार त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों से लगभग 6 हज़ार ब्रू मतदातों ने त्रिपुरा सरकार के द्वारा उपलब्ध कराये गये वाहनों से 35V किलोमीटर की यात्रा करके मिज़ोरम-त्रिपुरा के कनमुन गाँव में बनाए गये करीब एक दर्जन विशेष मतदान केन्द्रों पर आकर अपने मताधिकार कर उपयोग किया था
लेखक मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल में राजनीति पढ़ाते हैं|
सम्पर्क- +919436768637, sljangu18@gmail.com
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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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