मुद्दा

 जरूरत के लिये मुसीबत का अविष्कार – प्रकाश चन्द्र

 

 

  • प्रकाश चन्द्र

 

आजादी के 73वें वर्षगाँठ पर लाल किले के प्राचीर से देश के प्रधानमंत्री ने प्रदूषण के प्रति अपनी सजगता और प्रतिवद्धता का परिचय देते हुये भारत को सिंगल प्लास्टिक मुक्त करने का आहवान किया। 2 अक्टूबर यानि गाँधी जयन्ती पर पूरे देश में इस वर्ष सिंगल प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान शुरू करने का ऐलान किया। इसमें एयर इंडिया और आइआरसीटीसी ने भी सिगल यूज प्लास्टिक को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने के लिये अपनी प्रतिवद्धता जताई। प्रधानमंत्री ने देश के दुकानदारों और व्यापारियों को इस अभियान में अपने सहयोग और भागीदारी देने की बात कही। प्रर्यावरण सुधार में समर्पित अन्य संस्थाओं ने भी इस बडें और जरूरी अभियान में अपनी प्रतिवद्धता को प्रकट किया।

1924 में टाईम मैगजीन ने अपने कवर पेज पर एक शख्स की तस्वीर छापी जिसके नाम के जगह लिखा- “ये ना जलेगा ना पिघलेगा”। वो शख्स था रसायन शास्त्र का वैज्ञानिक लियो बैकलैंड ये वही शख्स था जिसने दुनियां को 1907 में फारमलडेहाइड और फेनाल जैसे कार्बनिक मिश्रण से बना ना जलने वाला ना पिघलने वाला अजर अमर प्लास्टिक दिया। बैकलैंड ने ये भी भविष्यवाणी की कि ये हमारे भविष्य के लिये अहम होगा ये भविष्यवाणी सच साबित हुई, और प्लास्टिक हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गया।शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की तरह प्लास्टिक भी एक जरूरी अंग है जो दैनिक जीवन में किसी ना किसी रूप में हमारे साथ है। प्लास्टिक के खतरनाक स्वभाव के बावजूद भी इसका हमारे दैनिक जीवन में बढ़ती जरूरत आज हमारे और हमारे प्रर्यावरण के लिये संकट का कारक बन गया है।

प्लास्टिक जो एक खतरनाक दुश्मन भी है और जीवन का अहम हिस्सा भी तो चलें इस जरूरत वाले दुश्मन को समझे। प्लास्टिक के ढेर पर खड़े होकर थोड़ा इस प्लास्टिक को जानें-

प्लास्टिक जटिल कार्बनिक यौगिकों फारमलडेहाइड और फेनाल के मिश्रण से बना एक पदार्थ है जिसे अंग्रेजी में काम्पलैक्स कार्बनिक कमपाउंड भी कहते हैं।

अलग-अलग कार्बनिक मिश्रणों से बने प्लास्टिक को कैसे पहचाना जाय और उसको किस काम में कैसे प्रयोग में लाया जाय इसके लिये सोसाइटी आफ प्लास्टिक इंडस्ट्रीज ने 1988 में इनके गुणधर्म के हिसाब से वर्गीकृत किया-

1.पालिएथिलीनटैरिफैथेलेट (पीईटी) – यह प्लास्टिक टैरिफ्थेलैट से बनाया जाता है।ये रिसाइकिल होने वाला पारदर्शी प्लास्टिक है।जिसको रिसाइकिल कर उसी गुणधर्म वाला या उससे बेहतर प्लास्टिक बनाया जा सकता है। ये शीतल पेय, खाद्य पदार्थो के पैंकिग,शैम्पू के बोतल के लिये प्रयोग होते हैं। पीईटी अपनी पैकेजिंग में रखे पदार्थो को सुऱिक्षत रखता हैं। इसको लगभग सुऱिक्षत माना जाता है।

2 हाई डैन्सीटी पाली ऐथीलीन (एचडीपीई)- ये उच्च घनत्व वाला पालोथीन है जो काफी हद तक तापरोधक होता है। इसे भी रिसाइकिल होने वाले श्रेणी में रखा जाता है।इसका प्रयोग दूध,जूस पानी की बोतलों के रूप में किया जाता है,इसके अलावा इसका प्रयोग अन्य खाद्य पदार्थो के पैंकेजिग और रिटेल बैग्स बनाने के लिये किया जाता है। वजन में हल्का और टिकाऊ होने के कारण ये प्लास्टिक ज्यादा प्रयोग में लाया जाता है।

3.पालीविनाइल या पालीविनाइलिडीन क्लोराइड (पीवीसी) इसका निर्माण विनाइल क्लोराइड रेजिन से किया जाता है।ये कठोर और मजबूत होता है। इस पर ताप और रसायन का प्रभाव नहीं होता। इसका प्रयोग वाटर पाइप, खिलौने,केबल, या अन्य पैकेजिंग के लिये किया जाता है।ये टाक्सिक श्रेणी का प्लास्टिक है। इससे कई तरह के विषाक्त रसायन निकलते हैं। इसलिये इसे खाद्य पदार्थो को रखने के लिये प्रयोग में नहीं लाया जाता। इसे भी कुछ हद तक रिसाइकिल कर सकते हैं। इससे निकलने वाले रसायन हमारे शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।

4.लो डेन्सीटी पाली ऐथीलीन (एलडीपीई) ये मोनोवर ऐथीलीन नामक कार्बनिक यौगिक से बनता है।इसका गुणधर्म एचडीपीई प्लास्टिक से मिलता-जुलता  है।ये लचीला और पतला प्लास्टिक होता है। इसका उपयोग रैपिंग मटेरियल  अर्थात बै्रड,विस्किट या अन्य खाद्य पदार्थो को रखने में किया जाता है। साथ ही इसे कास्मैटिक बोतल बनाने में प्रयोग में लाया जाता है। इसका प्रयोग भी लगभग सुरक्षित माना जाता है।

5.पालीप्रोपीलीन (पीपी)– यह प्रोपीलीन नामक कार्बनिक रसायन से बनता है। इसको भी कुछ हद तक रिसाइकिल किया जाता है। चूँकि इस पर किसी भी रसायन का असर नहीं होता इसलिये इसका उपयोग कैमिकल से बने पदार्थो को रखने में किया जाता है। जैसे सफाई करने के उत्पादों,चिकित्सा उत्पादों के कंटेनर के तौर पर। इसको भी लगभग सुरक्षित माना जाता है।

6.पालीस्टाइरीन (पीएस)ये पालीस्टाइरीन नामक कार्बनिक रसायन से बनाया जाता है। इस श्रेणी के प्लास्टिक को रिसाइकिल नहीं किया जा सकता है। इसके प्रयोग की बात करें तो ये डिस्पोजल कप प्लेट बनाने के काम आता है साथ ही कुछ कुछ फूड कंटेनर के रूप में भी प्रयोग होता है। इससे काफी खतरनाक रसायनों का रिसाव होता है इसलिये इसे बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं माना सकता।

7.ओ टाइप प्लास्टिक– ये कई प्रकार के प्लास्टिक का मिश्रण है,जिसमें खासतौर पर पालीकार्बोनेट होता है। चूँकि ये कई प्रकार के प्लास्टिक का मिश्रण है,इसलिये इसका कुछ हिस्सा ही रिसाइकिल किया जा सकता है।

इस प्लास्टिक से सीडी,सीपर,सनग्लासेस,केचप कन्टेनर बनाये जाते हैं विशेषज्ञ मानते हैं कि इसमें हमारे हार्मोस पर असर डालने वाले रासायन होते हैं। इसलिये इसके प्रयोग से बचना चाहिये।

कई विरादरी में बंटे प्लास्टिक की थोडी जानकारी लेने के बाद इसकी मौजूदगी पर गौर किया जाय तो आप हैरान होंगे पूरे विश्व में हर साल लगभग 300 मिलियन टन प्लास्टिक यूज होता है।जिसका केवल 10% ही रिसाइकिल होता है। शेष कचरे के रूप में हमारे जल,थल,नभ में सुरक्षित है।यही सुरक्षित और हर दिन बढ़ता कचरा आज हमारे और हमारे प्रर्यावरण के लिये मुसीबत बन गया है।

मुसीबत ऐसी की प्रर्यावरण की समझ रखने वालों के हाथ पैर फूलने लगे है। केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड के अनुसार अकेले भारत में प्रत्येक दिन लगभग 25,940 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है,जिसमें आधा से ज्यादा सिंगलयूज प्लास्टिक होता है जो रिसाइकिल नहीं होता,बचे आधे का भी कलैक्शन,रखरखाव और निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं है।

सिंगलयूज प्लास्टिक जिसे प्रर्यावरण के लिये सबसे ज्यादा मुसीबत माना जा है जिससे सख्ती से निबटने का जिक्र प्रधानमंत्री ने भी किया। आखिर क्या है सिंगलयूज प्लास्टिक और क्यों है ये हमारे और हमारे प्रर्यावरण के लिये सबसे खतरनाक?

साधारण बोलचाल में सिंगल यूज प्लास्टिक वो प्लास्टिक है जिसे हम एक बार प्रयोग करके फैंक देते हैं।मसलन  प्लास्टिक की थैलियां,पानी और कोल्डड्रिक की बोतलें डिस्पोजल कप और प्लेट आदि।चूँकि ये एक बार के लिये ही इस्तेमाल किये जाते है, और अगले इस्तेमाल के लिये फिर दूसरा लेते हैं ऐसे में इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है पर ये रिसाइकिल भी नहीं होता।परिणाम स्वरूप ये कचरे के रूप में हर जगह बेहतासा बढ़ रहा है,और फैल रहा है। ये कम से कम दिखे ना इसके लिये इस अमर प्लास्टिक का समय-समय पर दाह-संस्कार या दफनाया जाता है,पर इसका अंत नहीं होता। जमीन में दबाने के बाद ये सैकड़ों सालों तक अनेक प्रकार के खतरनाक रसायनों का रिसाव कर मिट्टी को नुकसान पहुँचाता है और हमारे भूजल के स्तर को प्रभावित करता है। इसको जलाने के कुप्रभाव भी कुछ कम नहीं है। इसके जलने से निकला धुँआ हमारे वायुमंडल में कार्बनडाई आक्साइड की मात्रा को दुगुना कर सकता है साथ ही अन्य खतरनाक गैसों का स्तर भी बड़ा सकता है।जिससे वायुमण्डल की ओजोन की परत को नुकसान पहुँचता है। बह के नदियों तालाबों झीलों या समुद्र में जाकर ये इनके इकोसिस्टम को प्रभावित करता है। जिसका परिणाम ये हैं कि इससे जीव-जन्तु मनुष्य और पर्यावरण बुरी तरह से प्रभावित हो रहें हैं।

 

जरूरत के लिये किये गये मुसीबत के अविष्कार ने हमारे पृथ्वी जल आकाश तीनों को यकीनन मुसीबत में डाला है,जिससे जागरूकता और जिम्मेदारी से निबटने की सख्त जरूरत है। इसमें सरकारों संस्थाओं और विशेषज्ञों की भागीदारी तो अहम है ही,आम लोगों की जिम्मेदारी और भागीदारी भी काफी अहम है।

जिसके लिये हमें सिंगलयूज प्लास्टिक को को दृढता से ना कहना होगा।और सरकार और संस्थाओं द्वारा चलाये अभियान में अपनी भी जिम्मेदारी और भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

लेखक व्यंग्यकार, आलोचक एवं शायर हैं|

सम्पर्क- +918860200507, writerprakash.c@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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