मैं कहता आँखन देखी

जनता के कटघरे में इंडियन एयर फोर्स

 

  • नवल किशोर कुमार

 

चाय दुकानों पर बतकही करते लोग पहले भी मिल जाते थे और अब तो बतकही का स्वरूप ही बदल गया है। पूर्वी दिल्ली के जिस इलाके में मैं रहता हूं, वहां आरएसएस का प्रभाव है। मुलाकात होने पर लोग जय श्री राम कह कर अभिवादन करते हैं। जो संघी नहीं हैं वे भी राम-राम कहकर ही मानते हैं। उनकी भाषा में जवाब नहीं देने पर बाजदफा लोग मुझसे खफा भी हो जाते हैं।

मैं बात कर रहा था कि आज चाय दुकान पर जो कुछ देखा-सुना उसके बारे में। दिल्ली में लोगों की बोली में पूरे भारत की तरह ही गालियां शामिल होती हैं। लोग जो बातें कर रहे थे, उसका सीधा मतलब यह कि सरकार का इकबाल खत्म होता जा रहा है। इकबाल यानी जनता के मन में सरकार के प्रति विश्वास। हालत यह हो गयी है कि अब सरकार से जुड़े हर मसले पर आम जनता शक की निगाह से देखती है। ताजा मामला है भारतीय वायु सेना का। नये एयर चीफ मार्शल राकेश सिंह भदौरिया ने कल एक वीडियो जारी किया जिसे कुछ न्यूज चैनलों ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक का सबूत कहा। लेकिन उस वीडियो की सत्यता पर सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि एयर चीफ मार्शल द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में दिखाए गए वीडियो में बालाकोट का वीडियो नहीं है।

दोष उन चैनलों का नहीं है जिन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में दिखाए गए वीडियो को एयर स्ट्राइक का सबूत बताया। कसूर तो इंडियन एयर फोर्स के नये कप्तान एयर चीफ मार्शल का है जिन्होंने वीडियो में एयर फोर्स का पराक्रम दिखाने का प्रयास किया। गोया भारत की मीडिया और जनता दोनों को इंडियन एयर फोर्स के पराक्रम पर कोई शक हो। वैसे यदि पूरे प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एयर चीफ मार्शल कहीं से पराक्रमी नहीं दिखे। वे बैकफुट पर थे।

भारतीय सेना का इस्तेमाल किस तरह से सत्ता की राजनीति साधने के लिए की जा रही है, इसका एक बड़ा कल नये एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने दे दिया। उन्होंने कबूल किया कि 27 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के बड़गाम इलाके में भारतीय हेलीकॉप्टर एमआई-17 को पाकिस्तान की एयर फोर्स ने नहीं बल्कि इंडियन एयर फोर्स के द्वारा दागे गये मिसाइल ने मार गिराया। इस कारण हेलीकॉप्टर उड़ा रहे पायलट विक्रांत शेरावत सहित 6 जवान मारे गए और एक सिविलियन की मौत भी हो गयी थी।

दरअसल, पूरा मामला पूरी दाल काली होने के मुहावरे को चरितार्थ करता दिख रहा है। पुलवामा आतंकी हमला पर भी सवाल पहले ही उठ चुका है कि कहीं उसके पीछे सत्ता पाने की राजनीतिक साजिश तो नहीं थी? फिर इसके बाद 26 फरवरी को बालाकोट में एयर स्ट्राइक ने तो भारतवासियों का मूड ही बदल दिया। पूरा देश देशभक्ति के रंग में रंग गया। उस पर हिंदुत्व का तड़का तो पहले से था ही। यानी उनके लिए सबकुछ अनुकूल होता चला गया जो आज देश में राज कर रहे हैं।

बहरहाल, सवाल यह नहीं है कि इंडियन एयर फोर्स ने 26 फरवरी 2019 को बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के कैंप को तबाह किया या नहीं किया। सवाल यह भी नहीं कि भारत की राजनीति में किस तरह की गंदगी फैलाई गई और कमल का फूल खिलाया गया। सवाल यह है कि यदि भारत के नौजवानों को राजनीति साधने के लिए मारा जाएगा तो आने वाले समय में कौन मां होगी और बाप होगा जो अपने बेटे को फौजी बनने देगा? इतना तो साफ है कि सेना का राजनीतिक उपयोग कर सरकार में बैठे लोगों ने सत्ता तो हासिल कर ली है, लेकिन सेना की साख घटी है। यह न सिर्फ सेना के लिए बल्कि देश के लिए बड़ा नुकसान है।

लेखक फॉरवर्ड प्रेस, दिल्ली के सम्पादक (हिन्दी) हैं|

सम्पर्क-  nawal4socialjustice@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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