मैं कहता आँखन देखी

दिल्ली में वैध होंगी अवैध कॉलोनियां

 

  • नवल किशोर कुमार

 

केंद्र सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। अब दिल्ली की 1797 अवैध कालोनियां वैध हो जाएंगी। इसके लिए संसद में सरकार अगले सत्र में बिल लाएगी। इस आशय की घोषणा कल केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह भूरी ने की। दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर किए गए इस एलान का खास मकसद है। सियासत जानने-समझने और करने वाले इस एलान को भाजपा का मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं। हालांकि मौजूदा सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्र के इस एलान का आगे बढ़कर स्वागत किया है और कहा है कि केंद्र द्वारा अधिसूचना जारी होने के साथ ही उनकी सरकार राजिस्ट्री शुरू कर देगी।

आज यह खबर दिल्ली में चर्चा का विषय है। मैं दिल्ली के जिस कॉलोनी में रहता हूं, वह भी अवैध कॉलोनी है। अवैध कॉलोनी का मतलब यह नहीं है कि यहां झोपड़ियां हैं। सड़कें, बिजली, पार्क आदि सब हैं इस कॉलोनी में भी। दिल्ली सरकार के द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरे और तेज रोशनी देने वाले एलईडी बल्ब भी हैं। इस कॉलोनी की सूरत बिहार के किसी बड़े शहर की तुलना में अधिक साफ-सुथरी है। लेकिन फिर भी यह अवैध है। यह अवैध क्यों है, इस बारे में यहां अधिकांश वाशिंदे नहीं जानते हैं। लेकिन वे लोग जिनके पास जमीन और मकान है, उनमें से कुछ वृद्ध बताते हैं कि बहुत पहले यह यमुना पार का इलाका कहलाता था। मुख्य दिल्ली से दूर एक इलाका। यमुना नदी के कछार पर बसी है यह कॉलोनी। पहले यहां जंगल था। लोगों ने यहां जंगल को साफ किया। जमीन पर कब्जा जमाया और फिर यहां भी जीवन शुरू हो गया। उनके मुताबिक यह करीब 30-40 साल पहले की बात है। अधिक पैसे वाले लोग इस इलाके में आना भी नहीं चाहते थे।

खैर अब यह इलाका कहने को अवैध है लेकिन हर मकान एक दरबे की तरह सजा है। अधिकांश घरों में एक से अधिक परिवारों का बसेरा है। 25 गज से लेकर 100 गज तक के भूखंडों पर बने इन घरों में कितने परिवार रहते हैं, इसका अनुमान लटक रहे एयरकंडीशन बिना पूछे ही बता देते हैं। मकान बने भी ऐसे हैं मानो खुद से सवाल कर रहे हों। किसी भी मकान की बुनियाद इतनी मजबूत नहीं है कि वे भूकंप का तेज झटका सह सकें। चूंकि यह इलाका अबतक कागजी तौर पर वैध नहीं है, इसलिए यहां मकान बनाने के लिए किसी प्राधिकार से अनुमति लेने की जरूरत भी हीं है। लोगों ने जैसे चाहा है, वैसे मकान बनवाए हैं।

बहरहाल, अवैध को वैध बनाने की सियासी कवायद से भाजपा को कितना लाभ होगा, यह तो चुनाव परिणाम बताएंगे, लेकिन सरकार को इसे बुनियादी तौर पर वैध बनाने की दिशा में भी पहल करनी चाहिए। निम्न और मध्यम आय वर्गीय लोगों के इन कॉलोनियों में केवल कागजी तौर पर वैधता से बात नहीं बनने वाली। उम्मीद करनी चाहिए कि सरकार इस दिशा में भी कोई ठोस पहल करेगी। वैसे इन कॉलोनियों में जमीन की कीमतें भी बढ़ेंगी और मुझ जैसे किरायेदारों को किराया भी अधिक देना होगा। यह भी तय है।

लेखक फॉरवर्ड प्रेस, दिल्ली के सम्पादक (हिन्दी) हैं|

सम्पर्क-  nawal4socialjustice@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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