देशशख्सियत

‘मनोहर’ कंधे पर हरियाणा की बेटी सुषमा की अंतिम विदाई – सोनू झा 

 

  • सोनू झा 

 

हरियाणा की ऐसी महिला नेता जिन्होंने देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई और राजनीति में हरियाणा का नाम रौशन किया। जिनकी आवाज में ऐसी ताकत थी, कि पूरा विश्व चुपचाप सिर्फ सुनने को मजबूर होता था, वो नाम है सुषमा स्वराज। जब सदन में सुषमा स्वराज बोलती थीं, तो विपक्ष बगलें झांकने लगता था। सत्ता में हों ना हों उसका परवाह किये बिना सुषमा स्वराज अपने राजनीतिक सफर पर निरंतर आगे बढ़ती रहीं। बेशक सुषमा स्वराज आज इस संसार को छोड़कर जा चुकी हैं लेकिन उनकी वाकपटुता, ओजस्वी भाषण, बुलंद आवाज, मृदुल स्वभाव हमेशा याद किये जाएंगे।

हरियाणा की बेटी की आखिरी विदाई जब दिल्ली में हो रही थी तो पूरा हरियाणा रो रहा था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ हरियाणा सरकार के कई मंत्री पहुंचे, आखिरी बार अपने प्रदेश की बेटी को नमन किया, किसी ने बुआ कहा, किसी ने बहन, किसी ने मां का दर्जा दिया। सीएम मनोहर लाल ने नम आंखों से विदाई दी और अपने कंधे पर हरियाणा की बेटी को आखिरी यात्रा पर लेकर निकले।

सुषमा स्वराज की अर्थी को कंधा देने के बाद सीएम मनोहर लाल ने कहा, ‘ सुषमा स्वराज हरियाणा की बेटी थीं, वे एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नेता थीं। वे हम सब को अचानक छोड़कर चली गईं। ये क्षण हमारे लिए दुख का क्षण है। उनका हरियाणा से विशेष स्नेह था उनके जाने से हम सभी को बहुत क्षति हुई है। समय समय पर हम हरियाणा के संदर्भ में उनसे चर्चा करते थे’

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा ‘उनका व्यक्तित्व अत्यंत संवेदनशील था। विदेश मंत्री के रूप में वे अप्रवासी भारतीयों की हर समस्या का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समाधान करवाती थी। वे अत्यंत ही योग्य नेत्री थीं और सदैव जनता की सेवा में लगी रहती थी।’ मनोहर लाल ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें।
हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष सुभाष बराला, परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार, शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, कृषि मंत्री ओपी धनखड़, वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भी सुषमा स्वराज के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा, ‘सुषमा स्वराज के आकस्मिक निधन से समाज और राजनीति में हुए शून्य को भर पाना कठिन है। उन्होंने कहा कि कार्य क्षेत्र में श्रेष्ठ आदर्श स्थापित किये हैं हमें समय समय पर उनका मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है।’
सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्रालय संभालने के दौरान कई लोगों की मदद की। सौम्य स्वभाव, सरल व्यक्तित्व, और प्रखर वक्ता के साथ उनमें कुशल गृहणी के भी सभी गुण थे। बेटी बांसुरी स्वराज को भी सुषमा ने अपने संस्कार दिये, बेशक आज बांसुरी लंदन में रहकर पढ़ाई की हो लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की सुषमा स्वराज ने बेटी का नाम बांसुरी क्यों रखा। दरअसल सुषमा स्वराज भगवान कृष्ण की भक्त थीं और यही वजह थी की उन्होंने अपने घर आई नन्हीं मेहमान का नाम बांसुरी रखा, ये उनके संस्कार का परिचायक है जो उनके रग रग में थी।

सुषमा स्वराज ने 1966 में अंबाला के एसडी कॉलेज में दाखिला लिया था। सुषमा लगातार 3 साल एनसीसी की बेस्ट कैडेट रहीं। सुषमा जब मंच पर बोलती थी तो उनकी आवाज और शब्दों में ऐसा जादू होता की सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता था। यही कारण था कि सुषमा लगातार चार सालों तक पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ और हरियाणा की बेस्ट स्पीकर बनकर अपना परचम लहराती रहीं। इसी कॉलेज ने सुषमा स्वराज को साल 1970 में बेस्ट स्टूडेंट के अवार्ड से नवाजा था। आज भी इस कॉलेज में छात्राओं को सुषमा स्वराज बनने की प्रेरणा दी जाती है।


1977 में जब हरियाणा में जनता पार्टी की सरकार बनी तो 25 साल की उम्र में ही मंत्री बनीं। जनता पार्टी की सरकार में 8 मंत्रालयों की कमान संभाली उसके बाद भारतीय जनता पार्टी में प्रखर वक्ता और कुशल राजनेता के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना ली।
सुषमा स्वराज सबसे कम उम्र में किसी एक राष्ट्रीय पार्टी की प्रवक्ता बनी थी। और वो देन उनके पिता की थी। उनके पिता छैल बिहारी ने उन्हें बचपन से ही एक ओजस्वी वक्ता और कवि के गुण कूट-कूट कर भर दिये थे। सुषमा स्वराज जब बहुत छोटी थी तभी वो अपनी सहेलियों के साथ खेलते हुए भाषण दिया करती थी। उनके पिता उन्हें कुर्सी पर खड़ा करके कहते थे, कि ये महसूस करो की सामने हजारों की संख्या में श्रोता बैठे हैं और अब तुम्हें अपनी कविता पढ़नी है या भाषण देना है।

हरियाणा में जन्मी सुषमा स्वराज 7 बार सांसद चुनी गई। तीन बार विधायक भी रहीं। अंबाला में पली बढ़ी और वहीं के एसडी कॉलेज से स्नातक की शिक्षा भी हासिल की। आज सुषमा स्वराज के निधन से जहां पूरे देश में शोक की लहर है वहीं हरियाणा में सुषमा स्वराज को खोने का सबसे ज्यादा गम है। आज हरियाणा की हर गली सुषमा स्वराज को याद कर रो रही है। हर गांव में आज उन्हीं की चर्चा है, हर शहर, हर मोहल्ला, हर नुक्कड़ हर चौक चौराहे पर सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि दी जा रही है, कोई नम आंखों से तो कोई उन्हें और उनकी उपलब्धियों को याद कर। आज हरियाणा की इस बेटी को सीएम मनोहर लाल ने अपने कंधों पर विदा किया, नम आंखों से भावुक मन से लेकिन उनकी यादें हमेशा हरियाणा ही नहीं बल्कि देश के जेहन में अमर रहेगा।

 

लेखक टीवी पत्रकार हैं|

सम्पर्क- +917827978234

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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