झारखंडलोकसभा चुनाव

राजनीतिक पार्टियों के लिए घोषणा पत्र – लियो ए सिंह

 

  • लियो ए सिंह

 

देश में चुनाव का मौसम चल रहा है । चुनावी दौर में हर राजनीतिक दल सत्ता पाने के लिए व्यापक रणनीति बनाता है जिसमें स्पष्ट पारदर्शी गतिविधियों से लेकर पर्दे के पीछे चलने वाले हथकंडे, जोड़-तोड, खींचतान सभी होते हैं। चुनाव लड़ने की इनकी इन्हीं तैयारियों का एक अहम हिस्सा होता है इनका घोषणापत्र, जिसके ज़रिये ये लोगों को यह बताने की चेष्टा करते हैं कि उन्हें सत्ता मिली तो वे लोगों की ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिए, देश को प्रगति-पथ पर आगे ले जाने के लिए क्या करेंगे।इसको तैयार करने की क़वायद आसान नहीं होती। इसकी अहमियत को समझते हुए इसे तैयार करने की जवाबदेही सभी दल अपने सबसे समझदार नेताओं को देते हैं। इसमें समय भी लगता है। अब तो जनता का घोषणापत्र बनाने के नाम पर, भले ही दिखावे के लिए ही सही, ये समाज के विभिन्न तबक़ों, समूहों से राय भी लेते हैं। इस सबके बावजूद अक्सर इन घोषणापत्रों में लोगों से जु़ड़े सभी बुनियादी मसले दिखाई नहीं देते। दरअसल, जनता के साथ संपर्क और संवेदनशीलता में आ रही निरंतर कमी की वजह से ऐसा होना अपेक्षित ही है। इसी को ध्यान में रखकर विभिन्न मसलों पर लगातार काम करने वाले जन संगठनों द्वारा अपनी ज़मीनी पकड़ और समझ के आधार पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद अपने घोषणापत्र बनाते हैं और फिर राजनीतिक दलों पर इसे अपने चुनावी घोषणापत्र में जोड़े जाने के लिए दबाव बनाते हैं। यह पहल इसलिए सराहनीय है कि इससे जनता की भागीदारी वोट देने से एक क़दम आगे बढ़ती है, चुनाव लड़ रहे दलों को जनता से जुड़े सवालों पर प्रतिबद्ध किया जा सकता है और अंतत: यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मज़बूत करती है । जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की झारखण्ड इकाई ने राज्य के विभिन्न मुद्दों पर बनी अपनी समझ के आधार पर ऐसा ही एक घोषणापत्र झारखण्ड में चुनाव लड़ रही विभिन्न पार्टियों को दिया है।

यह दीगर बात है कि सत्ता पाने पर वे इस पर अमल करेंगे या नहीं। बल्कि कई मामलों में अमल नहीं ही होता या कहें कि किया नहीं जाता और फिर चुनाव में ऐसे मुद्दों को चर्चा से दरकिनार कर दिया जाता है। इसीलिए ज़रूरी है कि देश में ऐसी क़ानूनी व्यवस्था हो जिसमें सत्ताधारी दल को चुनाव में पिछले घोषणापत्र पर अपना रिपोर्ट कार्ड देश के सामने रखना अनिवार्य हो और जिसे लोगों तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग पर हो। दरअसल, अक्सर देखने में आता है कि चुनावी घोषणापत्र में मतदाताओं को रिझाने, बहलाने के लिये अनेक ऐसी लोक लुभावने बातें भी डाली जाती हैं, जिनके प्रति पार्टी या तो ख़ुद ही गंभीर नहीं होती या फिर उन्हें निभाना संभव नहीं होता और इसी वजह से रिपोर्ट कार्ड की यह व्यवस्था ज़रूरी लगती है, ताकि वादा निभाने में असफल या झाँसा देकर सत्ता में आने वालों की असलियत जनता के सामने आ सके।

झारखण्ड के लिए राजनीतिक दलों को सुझाया गया घोषणापत्र:

1.जल, जंगल, जमीन एवं प्राकृतिक संसाधनों पर समुदाय का हक़ होगा ।

2.राज्य में पेसा क़ानून की मूल भावना के अनुरूप ग्राम सभाओं को अधिकार संपन्न बनाया जाएगा।

3.आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए संविधान प्रदत्त सभी प्रावधानों का क्रियान्वयन होगा ।

4.आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षण प्रदान किया जाएगा ।

5.सुप्रीम कोर्ट द्वारा वन पट्टे के रद्द आवेदन वालों को बेदख़ल करने के आदेश को रद्द कराने के लिए पूरी ताक़त से कोर्ट में इसका विरोध किया जाएगा।

6.वन अधिकार क़ानून के तहत सभी सामुदायिक एवं निजी, नए एवं लंबित आवेदकों को प्राथमिकता के आधार पर जाँच कराकर पट्टे देने का कार्य किया जाएगा ।

7.जीविका के लिए वन से मिलने वाले वनोत्पादों पर आश्रित परिवारों को इसकी अनुमति दी जाएगी ।

8.भूमि अधिग्रहण क़ानून 2013 में राज्य सरकार द्वारा किए गए संसाधन को रद्द किया जाएगा ।

9.उपयोग में नहीं ली गई पाँच साल से ज्यादा पहले अधिग्रहित जमीन रैयतों को वापस की जाएगी ।

10.राज्य की लैंड बैंक की वर्तमान व्यवस्था रद्द की जाएगी

11.राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए धर्म स्वातंत्र्य क़ानून को रद्द किया जाएगा ।

12.सरना धर्म कोड को मान्यता दी जाएगी ।

13.राज्य में इस सरकार द्वारा लागू स्थानीयता नीतियों को लेकर राज्य में व्याप्त असंतोष के मद्देनज़र इसकी समीक्षा की जाएगी ।

14.राज्य में हुए मॉब लिंचिंग के मामलों की फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराकर दोषियों को यथाशीघ्र सज़ा दिलाई जाएगी और मृतकों के परिवारों के जीवन यापन की समुचित व्यवस्था की जाएगी ।

15.राज्य में हुई भूख से मौतों के मामलों की जाँच में लापरवाही के दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही की जाएगी और मृतक के परिवारों को समुचित मदद दी जाएगी ।

16.राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे- पेंशन, राशन, बीमा का लाभ हर पात्रताधारी परिवार एवं व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर क़दम उठाए जाएँगे ।

17.सामाजिक सुरक्षा सहित सभी मामलों में आधार की अनिवार्यता समाप्त की जाएगी ।

18.महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। बलात्कार, उत्पीड़न से लेकर छेड़छाड़ जैसे मामलों को सख़्ती से निपटा जाएगा ।

19.नरेगा के अंतर्गत काम माँगने वालों को काम मिलना सुनिश्चित किया जाएगा और काम के दिनों को साल में 100 से बढ़ाकर 150 और न्यूनतम मज़दूरी को 300 रुपए किया जाएगा ।

20.असंगठित मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाएगा और उनके हितों को क़ानूनी संरक्षण दिया जाएगा ।

21.झारखण्ड को भ्रष्टाचार और कॉर्पोरेट के चंगुल से मुक्त कराया जाएगा।

22.मोमेंटम झारखण्ड, डोभा जैसी योजनाओं में सरकारी राजस्व की बर्बादी और लूट की जाँचकर ज़िम्मेवारी तय की जाएगी ।

23.ग्राम सभा की सहमति के बिना जोर-जबरदस्ती ली गई जमीन और पर्यावरण संरक्षण के नियमों की अनदेखी कर लगाए जा रही परियोजनाओं को रद्द किया जाएगा ।

24.राज्य सरकार द्वारा उद्योग, व्यापार या खनन के लिए कोर्पोरट्स को अनुचित लाभ दिए जाने की शिकायतों के मामलों की जाँच की जाएगी और सही पाए जाने पर राज्य को हुए राजस्व में घाटे की उनसे वसूली की जाएगी।

25.सरकारी  शिक्षा-व्यवस्था को भरोसे के लायक और गुणवत्तापूर्ण बनाया जाएगा ।

26.शिक्षा अधिकार क़ानून को निजी सहित सभी शिक्षण संस्थाओं में लागू कराया जाएगा ताकि ग़रीब बच्चों को अच्छे संस्थानों में पढ़ने का अवसर मिले।

27.उच्च शिक्षा संस्थानों में देश के श्रेष्ठ संस्थानों के समान स्तरीय शिक्षा के लिए ज़रूरी उपाय किए जाएँगे।

28.राज्य में न्यूनतम ख़र्च पर कैंसर, लीवर, गुर्दा एवं घुटना प्रत्यारोपण, हृदय शल्य क्रिया जैसे गंभीर रोगों की गुणवत्ता पूर्ण चिकित्सा के लिए सरकारी अस्पताल बनाए जाएँगे।

29.झारखण्ड में व्याप्त भीषण पेयजल संकट के निदान के लिए जल संग्रहण और संरक्षण के लिए युद्ध स्तर पर क़दम उठाए जाएँगे ।

30.राज्य की स्थानीय भाषाओं को समृद्ध करने की पहल की जाएगी और झारखण्ड में सरकारी स्कूलों और राजकाज में इसके उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

31.झारखण्ड से होने वाली मानव तस्करी पर सख़्ती से रोक लगाई जाएगी और इस नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा ।

32.झारखण्ड में राजनीतिक कारणों से झूठे मुक़दमों में फँसाये गए एवं जेलों में बंद लोगों के मामलों की समीक्षा कर उन्हें राहत दिलाई जाएगी ।

33.विस्थापन के नए और पुराने मामलों में मुआवज़े और पुनर्वास के लंबित मामलों का विधि पूर्वक निपटारा किया जाएगा ।

34.सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए समुचित पहल की जाएगी ।

35.अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित संस्थानों की स्वायत्तता और उन्हें उचित सरकारी सहायता और अनुदान बरक़रार रखी जाएगी।

36.मवेशियों के व्यापार पर लगा प्रतिबंध हटाया जाएगा और गोवंश संवर्धन के लिए बड़े पैमाने पर छोटी-छोटी डेयरियाँ खोलने को प्रोत्साहित किया जाएगा।

37.भूमिहीन परिवारों को भूमि और बेघर परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जाएगा ।

38.व्यवसायियों को व्यापार के लिए सुरक्षित परिवेश, अधिकारियों की प्रताड़ना से मुक्ति और प्रोत्साहन दिया जाएगा।

39.राज्य के शहरों में ट्रैफ़िक जाम एवं प्रदूषण की विकराल होती समस्या से निपटने को प्राथमिकता दी जाएगी ।

40.सुखाड़, अतिवृष्टि, ठनका जैसी प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ितों को समुचित सरकारी सहायता दी जाएगी।

41.राज्य में हॉकी, तीरंदाज़ी जैसे खेलों में उपलब्ध प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की क्षमता के विकास के लिए आधारभूत संरचना एवं उन्हें समुचित सहयोग राशि दी जाएगी।

42.राज्य में जेपीएससी जैसी भ्रष्टाचार में लिप्त अकर्मण्य संस्थाओं को दुरुस्त कर रोज़गार के अधिकाधिक अवसर युवाओं के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

लेखक झारखंड में जन आन्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के सक्रिय कार्यकर्ता हैं|
सम्पर्क-  +917079935401, leo.a.singh70@gmail.com
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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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