देशकाल

ठगी एक राष्ट्रीय परिघटना है – राहुल सिंह

 

  • राहुल सिंह

 

नोटबंदी के बाद डिजिटिल लेनदेन के बढ़ावे ने जिस ढंग से इलेक्ट्रानिक पेमेंट के अलग अलग भुगतान के ऑनलाइन एप्प, पे कार्ड आदि की बाढ़ ला दी है। इसने एक दूसरे किस्म की परेशानी को जन्म दे दिया है, इसे आप साईबर ठगी कह सकते हैं। अव्वल तो किसी भी एप्प (एप्लीकेशन) के डाउनलोड की बुनियादी शर्त यही है कि वह आपके डिवाइस के डाटा तक पहुँच सकता है। अमूमन इसे निजता या गोपनीयता के लिए खतरा माना जा रहा था। पर नोटबंदी के बाद से साईबर ठगी के आँकडों को कोई स्वतंत्र अध्ययन या शोध किया जाये तो मालूम होगा कि इस दिशा में भारत ने पिछले पाँच वर्षों में इतिहास रच दिया है। ऐसा नहीं है कि नोटबंदी से पहले साईबर ठगी जैसी चीज नहीं थी। पर इसमें बेतहाशा वृद्धि नोटबंदी के बाद देखने को मिली है। पहले यह ठगी प्राइवेट कंपनियाँ बीमा पॉलिसी और म्यूचुअल फंड बेचने के नाम पर करतीं थीं। उस ठगी में जो सब्जबाग दिखाये जाते थे, वह झूठ निकलता था। पर अब तो आपकी जानकारी के बिना आपके खाते से पैसे उड़ा लिये जा रहे हैं। आपके कार्ड से शॉपिंग कर ली जा रही है। फिलहाल देश के साईबर क्राईम की राजधानी झारखंड के जामताड़ा का इलाका है। अगर यहाँ के स्थानीय अखबारों के खबरों का विश्लेषण करें तो पायेंगे कि हर रोज कम से कम आधा अलग-अलग राज्यों की पुलिस किसी साईबर अपराध के सिलसिले में यहाँ आती-जाती रहती है। एक अखबार ने तो अपना पूरा पन्ना साईबर अपराध की गतिविधियों को ही दे रखा है। देवघर में साईबर अपराध के लिए अलग से साईबर थाना की स्थापना की गई है। यहाँ के एटीएम से अवैध निकासी का ग्राफ इस कदर बढ़ गया है कि एटीएम में अब आपको कैश निकालने के लिए अपना परिचय पत्र दिखाना पड़ रहा है। आधी रात के बाद शहरी क्षेत्र के एकाध दर्जन एटीएम को छोड़कर बाकी बंद कर दिये जाते हैं। वह इसलिए कि रात्रि के 12 बजे के पहले और 12 बजे के बाद दो बार नगदी निकालने के काम को अंजाम दिया जा रहा है। अभी-अभी पकड़े गये एक साईबर ठग ने बताया कि एटीएम का क्लोन बनाने की मशीन तो घर बैठे नामी साईट्स से कैश ऑन डिलीवरी पर आप मंगा सकते हैं। ठगी को रोकने की तमाम कोशिशें नाकाफी साबित हो रही है।

बैंक खातों को आधार से लिंक कराने की अनिवार्यता इन साइबर ठगों के लिए वरदान साबित हुई है। बैंक अधिकारी बन कर फोन करते हुए इनकी बुनियादी टेक यही हुआ करती है कि आपका बैंक अकाउंट आधार से लिंक नहीं होने के कारण आपका एटीएम ब्लाॅक कर दिया जा रहा है। जानकारी के अभाव में जो भी फोन पर उन्हें इस परेशानी को दूर करने के लिए निवेदन करता उनसे उनकी एटीएम की डिटेल लेकर अकाउंट से पैसा उड़ाना इनके लिए पल भर का काम रह गया है। इनके ठगी के किस्सों की बारीकियों से अगर आपको जानने का मौका मिले तो हैरत से भरने के अलावा आपके पास कोई चारा नहीं बचेगा। ठगी के नई-नई स्कीमें यह जिस ढंग से लेकर आ रहे हैं, उसे जानने के बाद उनकी दिमाग की दाद दिये बगैर आप नहीं रह सकते। इस कड़ी में जो नया तरीका है, वह एसएमएस या व्हाट्सएप से प्राप्त होनेवाला यह मैसेज है कि “आपको आयकर से रिफंड के बतौर इतनी राशि मिली है। यह राशि आपके खाते में भेज दी जायेगी। नीचे दिये गये लिंक में जाकर आप अपने अकाउंट डिटेल को वैरीफाई कर लें। अगर वह गलत हो तो उसे सुधार कर भेज दें।“ 31 जुलाई जो अमूमन आयकर की रिटर्न फाईल करने की आखिरी तारीख होती है, उसके बाद से यह मैसेज अभी हवा में तैर रहा है। ऐसा नहीं है कि इसमें कम पढ़े-लिखे या ग्रामीण परिवेश के लोग फंस रहे हैं। उनकी तुलना में पढ़े-लिखे और नौकरीशुदा लोगों के साथ यह वाकया ज्यादा घटित हो रहा है। दिलचस्प बात यह है कि ठगी के शिकारों में जज, पुलिस अधिकारी और नौकरशाह तक शामिल है।

इसके अलावा ठगी के इतने तौर-तरीके विकसित हो गये हैं कि सबके बारे में बात करने के लिए तो एक स्वतंत्र किताब की जरूरत पड़ेगी। अब जैसे सेलिंग साईट्स की बात करें तो अमेजोन या फ्लिपकार्ट को छोड़ दें। यह ग्राहकों के भरोसे पर पूरी तरह से खरे उतरे हैं। लेकिन फेसबुक जैसे सोशल साईट्स पर सैंकड़ों उत्पादों ऑनलाइन बिक्री के सैंकड़ों विज्ञापन आते रहते हैं। ऐसी ही एक चोर साईट है, ईजीडील्स। इधर पिछले तीन-चार महीने में इस साईट ने बड़ी संख्या में जेबीएल के ब्लूटूथ स्पीकर के नाम पर लोगों के साथ ठगी की है। तकरीबन 5 हजार की कीमत वाले स्पीकर को इसने 1799 रूपये की आकर्षक कीमत के साथ विज्ञापित किया और डिलीवरी के वक्त भुगतान के बजाय अग्रिम भुगतान कर डिलीवरी लेने पर उसकी कीमत 1439 रूपये बताई गई। पिछले तीन महीनों से यह एक ही उत्पाद की तस्वीर दिखा कर उपभोक्ताओं को ठगने का काम कर रही है। तस्वीर में दिखाये गये उत्पाद की तुलना में कोई बचकाना-सा स्पीकर भेज कर यह लोगों को ठग रही है। मजे की बात यह है कि इसका कस्टमर केयर नंबर प्रोटेक्टेड है, मतलब आपकी कॉल एक रिंग के बाद स्वतः ही कट जायेगी। आपके इेमेल का भी कोई जवाब इनकी तरफ से मिलना नहीं है। पता भी इतना संक्षिप्त की ओखला पहुँचकर भी, शायद ही आप इस पते पर पहुँच सकें।

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ठगी के ऐसे किसिम-किसिम के किस्से हवा में तैर रहे हैं। ठगी का यह स्वर्णिम दौर है। हर कोई ठगी में शामिल है या ठगी का शिकार है। एक ओर सत्तर-अस्सी रूपये का पेट्रोल-डीजल खरीदते हुए आप ठगी का शिकार हो रहें हैं तो दूसरी ओर लाखों की घर खरीदते हुए भी आप ठगी के शिकार हो रहे है। हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के बाद ईलाज के पैसे क्लेम करते वक्त आप ठगी के शिकार हो रहे है। अखबार और खबरों को पढ़ने-देखने के स्तर पर आप ठगी के शिकार हो रहे हैं। चिकित्सा के नाम पर ठगी के शिकार हो रहे हैं तो शिक्षा के नाम पर भी। नौकरी के नाम पर तो खुद सरकारें ठगी में शामिल हैं। रोजगार के लिए माँगे जा रहे आवेदनों के साथ शुल्क भी लिया जाता है। लेकिन विज्ञापित पदों के आलोक में अव्वल तो परीक्षायें नहीं हो रहीं हैं। गर परीक्षायें हो रहीं हैं तो परिणाम नहीं आ रहे हैं। परिणाम आ रहे हैं तो नियुक्तियाँ लटका दी जा रहीं हैं। विश्वविद्यालयों में तो रोजगार का आलम यह है कि अच्छे खासे केन्द्रीय विश्वविद्यालयों तक में हर दो वर्ष में विज्ञापित पद के आलोक में आवेदन माँगे जा रहे हैं, पर नियुक्तियों का कहीं अता-पता नहीं है। इस लिहाज से इस दौर को देखें तो ठगी इस वक्त देश की राष्ट्रीय गतिविधि है। एक राष्ट्रीय परिघटना है। हम चाहें ना चाहें लेकिन रोजमर्रे के जीवन में अब सैंकड़ों मौके हैं, जिसमें जाने-अनजाने हम ठगी के शिकार होने को अभिशप्त हैं। ऐसा नहीं है कि यह ठगी दर्ज की जा सकने लायक ही लगे। मसलन् आप दूध, मिठाई, सब्जी कुछ भी खरीदते हुए ठगी के शिकार हो सकते हैं, हो रहे हैं।

लेखक हिन्दी के युवा आलोचक हैं |

सम्पर्क- +917979847926, alochakrahul@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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