मैं कहता आँखन देखी

फुले दंपत्ति को गद्दार मनुवादी सावरकर के साथ न रखे भाजपा

 

  •  नवल किशोर कुमार

 

भारतीय जनता पार्टी की ओर से महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को लेकर घोषणापत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि भाजपा को अगर जीत मिली तो वह जोतीराव फुले और सावित्रीबाई फुले के साथ सावरकर को भारत रत्न का सम्मान दिलाएगी। भाजपा के द्वारा एक बार फिर साजिश की जा रही है। दलित-बहुजनों के प्रात: स्मरणीय फुले दंपत्ति के सहारे वह उस सावरकर को स्थापित करना चाहती है जिन्होंने आजीवन मनुवाद आधारित जाति व्यवस्था को बनाए रखने का अभियान चलाया। जातिगत श्रेष्ठता सावरकर के लिए सबसे महत्वपूर्ण था। जबकि फुले दंपत्ति का पूरा जीवन जाति आधारित सामाजिक व्यवस्था के खात्मे के लिए समर्पित रहा।

ऐसे में भाजपा की साजिश को आसानी से समझा जा सकता है। वह उस सावरकर को शिवाजी की तरह स्थापित करना चाहती है जिसने अंग्रेजों से 6 जनवरी 1924 को माफी मांगी और अपनी रिहाई मांगी। अंग्रेजों ने उसके माफीनामे को कबूल किया और कुछ शतों के साथ रिहाई दी। जिन शर्तों पर उसकी रिहाई हुई थी, उनके अनुसार, सावरकर को रत्नागिरी जिले में रहना था। और पांच साल तक सरकार की अनुमति के बिना या आपात स्थिति में जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जिले से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। यही नहीं, उसे राजनीतिक गतिविधियों में भी सार्वजनिक या निजी तौर पर भाग लेने की अनुमति नहीं थी। यह प्रतिबंध जनवरी 1929 तक के लिए था।

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दरअसल, आरएसएस द्वारा सावरकर को देशभक्त साबित करने के अलावा उसे दलित-बहुजनों के हितों का रक्षक बताने की साजिश पहले भी की जाती रही है। आरएसएस की ‘दलित आन्दोलन पत्रिका’ के ताज़ा अंक (जुलाई 2017) में  विवेक आर्य नामक लेखक ने लिखा कि  वीर विनायक दामोदर सावरकर भारत के प्रथम दलित उद्धारक थे। अपने कहे को साबित करने के लिए विवेक आर्य ने लिखा : ‘8 जनवरी 1924 को सावरकर जी ने घोषणा की वे रत्नागिरी में दीर्घकाल तक आवास करने आए हैं और छुआछूत समाप्त करने का आन्दोलन चलाने वाले हैं। उन्होंने उपस्थित सज्जनों से कहा कि अगर कोई अछूत वहाँ हो तो उन्हें ले आए, और अछूत महार जाति के बंधुओं को अपने साथ बैलगाड़ी में बैठा लिया।’

जाहिर तौर पर आरएसएस और उसके कथित बुद्धिजीवी अपनी ओर से पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि इतिहास को उलट दिया जाय। इसके लिए जिस तरह के तर्क तलाशे जा रहे हैं, उसका पर्दाफाश विवेक आर्य के लिखे से हो जाता है।

बहरहाल, भाजपा अभी सर्वशक्तिमान है और इसके अपने कारण हैं। सर्वशक्तिमान होने के कारण वह चाहे तो सावरकर को भारत रत्न क्या गांधी को हटाकर राष्ट्रपिता का खिताब दे सकती है। वह उसको राम बना सकती है, विष्णु और ब्रह्मा का पद भी दे सकती है। जोतीराव फुले और सावित्रीबाई फुले को सावरकर के साथ रखकर दलित-बहुजनों का अपमान न करे।

लेखक फॉरवर्ड प्रेस, दिल्ली के सम्पादक (हिन्दी) हैं|

सम्पर्क-  nawal4socialjustice@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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