सामयिक

विज्ञापन वाली लडकियाँ – ध्रुव गुप्त 

 

  • ध्रुव गुप्त 

 

किसी ख़ास ब्रांड का सूट, जीन्स, बनियान या अंडरवियर पहनने से लडकियाँ मक्खियों की तरह लड़कों के इर्दगिर्द मंडराती रहती हैं। किसी ख़ास ब्रांड के परफ्यूम लगाने वाले मर्दों के पीछे वे एकदम भुक्खड़ों की तरह भागती हैं। किसी ख़ास कम्पनी की बाइक अगर आपके पास है तो लिफ्ट मांग कर सरेराह आपसे लिपट जाने वाली लड़कियों की कोई कमी नहीं है। यहाँ तक कि अगर आपके घर का बाथरूम किसी ख़ास कम्पनी के उपकरणों से सुसज्जित है तो कोई अनजान लड़की आपके बाथरूम में प्रवेश कर सेक्सी नृत्य तक करने लगती हैं। टेलीविज़न और अखबारों में आने वाले ऐसे विज्ञापनों को देखकर हैरत होती है कि क्या हमारे देश की लडकियाँ सचमुच इतनी ही खाली दिमाग और मूर्ख हैं? सबको पता है कि यह सही नहीं है। फिर देश के किसी भी कोने से ऐसे फूहड़ विज्ञापनों के खिलाफ कोई आवाज़ क्यों नहीं उठती? स्त्रियों को अपमानित करने वाले ऐसे तमाम अश्लील विज्ञापनों के विरुद्ध कोई मुकदमा या याचिका दायर क्यों नहीं होती? देश और तमाम प्रदेशों में स्त्रियों की प्रतिष्ठा की रक्षा करने के लिए महिला आयोग मौज़ूद हैं। क्या अभी तक किसी भी महिला आयोग ने ऐसा विज्ञापन बनानेवाली कम्पनियों और उन्हें दिखाने वाले टीवी चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को नोटिस देकर उन्हें बन्द कराने की कोई कार्रवाई कभी की है?

क्या आपको भी ऐसे विज्ञापन देखकर कभी गुस्सा नहीं आता ?

लेखक भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी तथा कवि एवं कथाकार हैं|

सम्पर्क- +919934990254, dhruva.n.gupta@gmail.com

 

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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